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Sunday, November 6, 2016

मेरा देश तरक्की कर रहा है पर कहाँ कर रहा है यह किसी को जानकारी नही है

नमस्कार 
में मलखानसिंह भदौरिया जिला भिंड म.प्र.     http://malkhan100.blogspot.com/2016/11/blog-post.html
विचार करने योग्य विषय है ??

स्वास्थ सेवाओं पर अरबों खर्च,शिक्षा पर अरबों खर्च,जनता का अरबों रुपये खर्च हो रहा है धरातल पर शाशन की योजनाओं की अशली तश्वीर देख कर एक सवाल मन में आता है आखिर मेरा देश तरक्की कहाँ कर रहा है,मोदी जी संसद में लच्छेदार भाषण देकर कांग्रेसियों पर व्यंग कसते है की कांग्रेसियों को सत्ता में रहकर इतनी अकड आ गयी है की उनकी गर्दन नही झुकती तो धरातल कैसे नजर आयेगी पर मोदी जी हम तो अपने देश में ही अकड कर चल रहे है पर आप तो जबसे प्रधानमन्त्री बने हो तबसे भारत की धरती पर कदम ही नही रखना चाहते !! हम भारत के किसानों का आग्रह है की कभी विदेशों से लौट कर स्वदेश के ग्रामीण अंचल की धरती पर कदम रखो तब आपको मालुम हो की हमारा देश कहाँ तरक्की कर रहा है कांग्रेस के लोग भलीभांति जानते है की भारत का ह्रदय ग्रामीण क्षेत्र है हिन्दुस्तान की कुल जनसंख्या का ८० फीसदी किसान है देश की कुल वार्षिक आय का ७० फीसदी हमें कृषि पैदावार से मिलता है ये पैदावार हमें हमारा अन्नदाता किसान अपनी कड़ी मेहनत से पैदा करके देता है यानी हमारे देश का पालनहार अन्नदाता किसान है जो आज खुद भुकमरी की कगार पर खडा है किसान के उत्पाद का मूल्य उनकी मेहनत और लागत के अनुशार उन्हें नही दिया जाता !!बिजली,खाद,कृषियंत्र,कीटनाशक, आदि के भाव निरंतर बडाये जा रहे है ! पर किसान के उत्पाद का मूल्य क्यों नही बडाया जाता ! किसान प्रतिवर्ष कर्ज में डूबता जा रहा है फलस्वरूप किसान आत्महत्या करने को मजबूर है महंगी बिजली,और बैंको से लिए ॠण चुकाने में असमर्थ किसान क्रषिकार्य छोड़ मजदूरी के लिए शहर की ओर पलायन कर रहा है क्या मोदी जी आपको नही लगता अगर हमारे देश का अन्नदाता किसान क्रषि कार्य छोड़ने लगे तो देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है !! हर कम्पनी के उत्पाद के दाम तेजी से बड रहे है कर्मचारियों/अधिकारियों तथा सांसदों/विधायकों का वेतन बडाया जाता हैं पर किसान के उत्पाद की कीमत क्यों नही बडाई जाती उस अन्नदाता की उसके ही देश में दो कौड़ी की इज्जत नही है किसान के उत्पाद का भाव बिचौलिये तय करते है सरकारी खरीद का लाभ चुनिन्दा किसान को मिलता है या फिर दलालों को !! कांगेस के शाशनकाल में एसा नही था पूर्व प्रधानमन्त्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी का सपना था की भारत के ग्रामीण क्षेत्र को विकशित किया जाए जबतक ग्रामीण क्षेत्र को विकशित नही किया जाएगा भारत में खुशहाली नही आएगी ! जिस देश का अन्नदाता दुखी हो आत्महत्या कर रहा हो उस देश का भला कैसे हो सकता है स्वर्गीय राजिव गांधी जी ने ग्रामीण क्षेत्र को विकशित करने की मंशा से ''राजीव गांधी विधुतीकरण योजना''हरित क्रांती योजना'' एलपीजी वितरण (आरजीजीएलवी)'' महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना'' स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का उन्‍नयन करने के लिए, सरकार ने 1000 से अधिक की जनसंख्‍या वाले 38,484 से अधिक ग्रामों को तथा पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में 500 से अधिक की जनसंख्‍या वाली सभी 20,867 आबादियों के लिए सड़क संयोजकता की व्‍यवस्‍था करने के एक प्रस्‍ताव का निरूपण किया था यह राजीव जी की ही दें है !!
भारत निर्माण योजना ग्रामीण इलाकों के लिए बनाई गई एक समयबद्ध योजना है। जिसके तहत सिंचाई, ग्रामीण आवास, जल प्रदाय, संचार तथा विद्युतीकरण आदि के क्षेत्र में विकास कार्य किया जाने के पीछे ग्रामीण क्षेत्र को विकशित किये जाने की पहल थी !!
ग्रामीण आवास आवास मानव अस्तित्व के लिए बुनियादी आवश्यकताओं में से एक है। आश्रयरहित एक व्यक्ति के लिए घर का का मिलना उसके अस्तित्व में एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन लाता है, उसे एक पहचान तो मिलती ही है साथ ही वह सामाजिक परिवेश का एक अंग भी बन जाता है।ग्रामीण विकास मंत्रालय इंदिरा आवास योजना की शुरूआत गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को वित्तीय सहायता प्रदान कर पक्‍का मकान बनवाती है।

इंदिरा आवास योजना (आईएवाय)
गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे अनुसूचित जाति, अनुसूचित
जनजाति और बंधुआ मजदूरों के निवास स्थलों के निर्माण और
उन्नयन के लिए वर्ष 1985-86 से भारत सरकार वित्तीय सहायता
प्रदान करने के लिए इंदिरा आवास योजना को कार्यान्‍वित कर रही है।
वर्ष 1993-94 से इस योजना के दायरे को बढ़ा कर इस योजना के
तहत गैर अनुसूचित जाति, जनजाति के गरीब परिवारों को भी शामिल
किया गया। लेकिन योजना के तहत कुल आवंटित राशि के 40% से
अधिक की सहभागिता इन्हें नहीं प्रदान की जाएगी। इस योजना का
विस्‍तार सेवानिवृत्त सेना और अर्द्धसैनिक बल के मुठभेड़ में मारे गए
लोगों के परिवारों तक भी किया गया है। योजना के तहत आवंटित
किए
जाने वाले 3 प्रतिशत मकान शारीरिक और मानसिक विकलांगों के
लिए वर्ष 2006-07 आरक्षित किए गए हैं। प्रत्‍येक राज्‍य में गरीबी
रेखा के नीचे के अल्‍पसंख्‍यकों को भी इस योजना का लाभ प्रदान के
लिए चिह्नित किया जा रहा है।
योजना के तहत प्रदान की जा रही सहायता में केंद्र और राज्‍य की
हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में होगी। चूंकि योजना का उद्देश्य
आवासविहीन लोगों की संख्या में कमी लाना है इसलिए योजना आयोग
द्वारा राज्यस्तरीय आवंटन में 75% आवासों की कमी को और
25% गरीबी को वरीयता दी गई है। जिलास्तरीय आवंटन में एक बार
फिर 75% वरीयता आवासों की कमी को तथा शेष 25% संबंधित
राज्य की अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को दी गई है।
एक बार आवंटन राशि तथा लक्ष्य तय होने के बाद जिला ग्रामीण
विकास एजेंसी/जिला परिषद इंदिरा आवास योजना के तहत ग्रामवार
बनाए जाने वाले मकानों की संख्या तय करती हैं और इस आशय की
जानकारी संबंधित गांवों को प्रेषित कर दी जाती है। इसके बाद ग्राम
सभाएं योजना के लाभार्थियों का चयन स्थायी इंदिरा आवास योजना
प्रतीक्षा सूची से करती हैं। इसके बाद किसी अन्य उच्च अधिकारी से
अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती।
इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत दी जाने वाली राशि को 1 अप्रैल,
2008 से मैदानी इलाकों में प्रति गृह निर्माण सहायता को 25,000
रुपए से बढ़ाकर 35000 रुपए और पहाड़ी/पर्वतीय क्षेत्रों में 27,500
रुपए से बढ़ाकर 38,500 रुपए कर दिया गया है। कच्चा मकान को
पक्का बनाने के लिए प्रति मकान 12,500 रुपए की राशि को बढ़ाकर
15000 रुपए कर दिया गया है। इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने
भारतीय रिजर्व बैंक से निवेदन किया है कि इंदिरा आवास योजना के
तहत प्रति मकान दिए जाने वाले लिए 20,000 रुपए तक के ऋण
को
4% की दर पर जारी करे।
योजना के तहत आवासीय इकाई परिवार की महिला सदस्य के नाम से
ही आवंटित होनी चाहिए। विकल्प के तौर पर मकान को महिला और
पुरूष (पति या पत्नी) दोनों के नाम पर भी आवंटित किया जा सकता
है। केवल उसी स्थिति में परिवार के पुरूष सदस्य के नाम मकान
आवंटित किया जाना चाहिए जबकि परिवार में कोई योग्य महिला
सदस्य न हो।
शौचालय, धुआं रहित चूल्हा, उपयुक्त नाली प्रत्येक इंदिरा आवास
योजना के घरों में होने चाहिए। लाभार्थी चाहे तो इंदिरा आवास मकान
के लिए अलग से शौचालय का निर्माण कर सकता है।
मकान का निर्माण करना लाभार्थी की व्यक्तिगत जवाबदेही है। किसी
ठेकेदार की सहभागिता को प्रतिबंधित किया गया है।
इंदिरा आवास योजना के तहत बनाए जाने वाले आवासों के लिए किसी
तरह का विशेष डिजाइन निर्धारित नहीं किया गया है। डिजाइन,
तकनीक और सामग्री का चयन पूरी तरह लाभार्थी के ऊपर निर्भर
करता
है।
इंदिरा गांधी आवास योजना के तहत 31 मई, 2008 तक 181.51
लाख आवासों का निर्माण किया गया तथा इस पर 36900.41 करोड़
रुपए व्यय हुए हैं।
वर्ष 2007-08 के दौरान प्रदर्शन
वर्ष 2007-2008 के दौरान केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवास
के लिए 40322.70 करोड़ रुपए आवंटित किए। इंदिरा आवास
योजना के तहत इस दौरान 21.27 लाख मकानों का निर्माण/
मरम्मत का लक्ष्य था, जबकि सरकार ने 19.88 लाख मकानों के
निर्माण/मरममत के लिए 5458.01 करोड़ रुपए (राज्य सरकार के
योगदान सहित) व्यय किए गए।
वर्ष 2008-09 के दौरान प्रदर्शन -- 2008-09 के लिए केंद्र ने 5,645.77 करोड़ रुपए जारी किए, इससे 21.27 लाख मकान इंदिरा आवास योजना के तहत बनाने का लक्ष्य है। इसमें से 1,694.48 करोड़ रुपए पहली किस्त के रूप मे दिए जा चुके हैं और 31 मई 2008 तक 85879 घरों का निर्माण किया गया है।
सिंचाई -- भारत निर्माण के सिंचाई मद के अंतर्गत चिन्हित किए गए बड़े और मझोले आकार की सिंचाई परियोजना अभियानों को चार वर्षों (2005-06 से 2008-09) के अंदर पूरा कर अतिरिक्त एक करोड़ हेक्टेयर भूमि हेतु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने क लक्ष्य रखा गया। 42 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता का निर्माण चल रहे अभियानों को शीघ्रतापूर्वक पूरा करके किया जाएगा। सिंचाई क्षमता के निर्माण और उनके दोहन में एक बड़ी विषमता है। भारत निर्माण के तहत कमान क्षेत्र विकास, जल प्रबंधन के साथ-साथ विस्तार, पुनरोद्धार और नवीनीकरण योजनाओं के द्वारा 10 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता की बहाली करना है।देश के ऐसे कई हिस्से हैं जहां भूमिगत जल संसाधन के अच्छे भंडार हैं लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। ऐसे भूमिगत जल भंडारों के विकास द्वारा 28 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का विकास करना।शेष 10 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता के लिए सतही प्रवाहशील जल के उपयोग वाली छोटी योजनाओं का सहारा लिया जाएगा। इसके अलावा जल भंडारों के मरम्मत, पुनरोद्धार और बहाली तथा छोटी सिंचाई योजनाओं के विस्तार, नवीनीकरण और पुनरोद्धार द्वारा भी 10 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता विकसित की जाएगी।
टेलीफोन सेवा -- ग्रामीण बुनियादी ढांचे के सुधार में बेहतर टेलीफोन सेवा की पहुंच का महत्वपूर्ण योगदान होता है। भारत निर्माण योजना के तहत जिन 66,822 राजस्व गांवो में सार्वजनिक फोन नहीं हैं, उन्हें भी शामिल किया जाएगा। इनमें से 14,183 सुदूर एवं दूर-दराज के गांवों में कनेक्टिविटी डिजिटल उपग्रह फोन टर्मिनल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इन ग्रामीण सार्वजनिक फोनों के लिए लागत और परिचालन व्यय राशि सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि से प्रदान की जाएगी।
ग्रामीण जल प्रदाय -- केंद्र सरकार ने ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं को विकास करने के उद्देश्‍य से 2005 में भारत निर्माण कार्यक्रम की शुरूआत की है जो वर्ष 2005-06 से 2008-09 तक की अवधि में लागू किया जा चुका है। ग्रामीण पेयजल भारत निर्माण कार्यक्रम के छ: घटकों में से एक है। भारत निर्माण को लागू की गई इस अवधि में जहां जलापूर्ति बिल्‍कुल नहीं थी ऐसे 55,067 क्षेत्रों और 3.31 लाख ऐसे इलाकों जहां आंशिक रूप से जलापूर्ति की जा रही थी, शामिल करके पेयजल उपलब्‍ध कराया गया। 2.17 लाख ऐसे इलाकों में स्‍वच्‍छ पेयजल उपलब्ध कराया गया जहां गंदे पानी सप्‍लाई की जाती थी। पानी की खराब गुणवत्ता से निपटने के लिए सरकार ने वरीयता क्रम में आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों को ऊपर रखा है। इसके बाद लोहे, खारेपन, नाइट्रेट और अन्य तत्वों से प्रभावित पानी की समस्या से निपटने का लक्ष्य बनाया गया है। एक बार जिन बस्तियों को पेय जल आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है उन्हें पुनः ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए जल स्रोतों के संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। गांवों और बस्तियों में पेय जल सुरक्षा स्तर बहाली के लिए वर्षा जल, सतही जल तथा भू-गर्भीय जल के उचित उपयोग की व्यवस्था करना। गांवों में पेय जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन, कार्यान्वयन और मरम्मत की ग्रामीणस्तर पर विकेंद्रीकृत, मांग आधारित और समुदाय प्रबंधित योजना के स्वजलधारा प्रारंभ की गई है। पेज जल में सामुदायिक भागीदारी को और बढ़ाने तथा मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेय जल गुणवत्ता निगरानी और सतर्कता कार्यक्रम फरवरी, 2006 में प्रारंभ किया गया। इसके तहत हर ग्राम पंचायत से पांच व्यक्तियों को पेय जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए शत प्रतिशत आर्थिक सहायता, जिसमें पानी परीक्षण किट भी शामिल है, प्रदान की जाती है।
ग्रामीण विद्युतीकरण
ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार ने अप्रैल 2005 में सभी गांवों और
बस्तियों का चार वर्षों में विद्युतीकरण
करने के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना लागू की।
इसके तहत हर घर तक बिजली
पहुंचाया जाएगा। इस योजना को भी भारत निर्माण योजना के अधीन
लाया गया है।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के लिए बुनियादी ढांचे की
जरूरत होगी जिसके लिए ग्रामीण
विद्युत वितरण रीढ़ (आरईडीबी) स्थापित करने की जरूरत होगी
जिसके लिए कम से कम एक
33/11केव्ही उप स्टेशन, ग्रामीण विद्युतीकरण ढांचा जिसके लिए हर
गांव में या केंद्र पर कम से कम
एक वितरण ट्रांसफॉर्मर और जहां ग्रिड नहीं लगाई जा सकती वहां
उत्पादन सुविधा के साथ ही स्वतंत्र ग्रिडों
की आवश्यकता होगी।
गांवों में उपलब्ध कराई जा रही आधारभूत सुविधाएं कृषि और विभिन्न
ग्रामीण गतिविधियों जैसे सिंचाई
पंप सेट, लघु और मध्यम उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग, शीत भंडार
श्रृंखला, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और
आईटी आदि की जरूरतों को पूरा करेंगी। इससे संपूर्ण ग्रामीण विकास
तो होगा ही साथ ही रोजगार के
अवसर उपलब्ध होंगे तथा गरीबी दूर करने में भी मदद मिलेगी।
योजना के क्रियान्वयन की केंद्रीय एजेंसी ग्रामीण विद्युतीकरण निगम
लिमिटेड द्वारा पूंजी लागत में 90
प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। गरीबी रेखा से नीचे के
घरों के विद्युतीकरण के लिए शत
प्रतिशत सब्सिडी, 1500 रुपए प्रति आवास की दर से प्रदान की जा रही है।
ग्रामीण वितरण प्रबंधन के लिए फ्रेचाइजी की मदद ली जा रही है।
ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजनाओं में
सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उपक्रमों की मदद संबंधित राज्य प्राप्त कर
सकते हैं।